Love Ka Full Form? Love क्या हैं व इसका पूरा नाम क्या हैं?

जीवन का आधार तो प्रेम हैं यह वाक्य अपने आप मे ही बहुत बड़ा सन्देश देता हैं।इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड में जितनी भी जीव, मानव उपस्थित हैं वो सबके सब प्रेम की पावन डोर से बंधे हुए हैं। प्रेम के बिना जीवन जीना मानो जैसे निर्जीव वस्तु की भांति समय व्यतीत करने जैसा हो। परंतु क्या LOVE की भी कोई फुल फॉर्म होती हैं। तो इसका साधारण सा उत्तर न होगा। क्योंकि Love जिसे प्रेम, प्यार व स्नेह के नाम से जाना जाता हैं उसकी कोई फुल्लफॉर्म नही हैं हालांकि, ये अलग विषय हैं कि गूगल सर्च इंजन पर ज्यादा सर्च करने से एक दो acronym मिल जाये। परंतु किसी विशेष व्यक्ति या लेखक के द्वारा LOVE की फुल्लफॉर्म नही बनी।

Love Ka Full Form? Love क्या हैं व इसका पूरा नाम क्या हैं?

प्रेम की बहुत से परिभाषा हैं जिनका अपना अपना अर्थ हैं प्रेम एक ऐसा शब्द हैं जिसके अर्थ में समूचा ब्रह्मांड व्याप्त हैं। व जिसकी डागर में हर एक जीव लिप्त होना चाहता हैं। परंतु वास्तव में प्रेम क्या हैं। व इसका जीवन में क्या योगदान हैं आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम इस सामान्य व संसार के सबसे प्रचलित शब्द Love के बारे में जानेंगे। तो बिना देरी किये शरू करते हैं आज के इस कथन को जिसके माध्यम से Love से जुड़े सभी तथ्य की चर्चा करेंगे।


Love क्या हैं इसका पूरा नाम क्या हैं?

Love जिसे हम आम भाषा मे प्यार,प्रेम,स्नेह व लगाव कहते हैं। इसकी कोई फुल्लफॉर्म नही होती। यह अपने आप मे ही सम्पूर्ण अर्थ रखता हैं।

आज के इस दैनिक जीवन मे हम ई Love You का सर्वाधिक उपयोग करते हैं व दुसरो से सुनते हैं। परंतु क्या I Love You की महत्ता को हर कोई समझ पाता हैं। एक समय था जब हीर ओर रांझा व लैला मजनू की प्यार की कहानी इतनी मशहूर थी। कि उनके नाम से आज भी उदहारण दिया जाता हैं। परंतु जबसे नवीनकरण की इस दुनिया मे नए नए संसाधन आ गए हैं प्यार महज एक शब्द बन कर रह गया हैं जिसको इस्तमाल तो बहुत लोग करते हैं परंतु इसकी वास्तविकता व सच्चाई को नही समझते।

हमारे आस पास के वातावरण में ऐसे बहुत से बद्धजीव मिलेंगे जो अपने नित्य जीवन मे I Love You का प्रयोग अपने किसी प्रियजन के लिए करते हैं परंतु दुविधा या अप्रिय घटना के घटित होते ही वो दिखाई भी नही पड़ते।

प्रर्म के जिस तरह अनेको अर्थ हैं ठीक उसी प्रकार इसके अनेको माध्यम हैं

प्रेम किसी एक विशेष व्यक्ति से नही होता, या प्रेम केवल एक स्त्री पुरुष का मिलन नही होता।

प्रेम कहि भी किसी भी अवस्था मे उजागर हो सकता हैं। एक माँ का प्रेम अपनी संतान के लिए। एक पालतू जानवर का प्रेम अपने मालिक के लिए। एक मित्र का प्रेम अपने सहयोगी मित्र के लिए। यह भवबन्धन प्रेम से ही बंधा हुआ हैं जिसके अनुरूप ये सृष्टि चल रही हैं।

परंतु आज के इस फैशन व टेक्नोलॉजी के दौर में हर कोई Love की बाते करता हैं। बिना यह जाने व समझे कि आखिर प्रेम हैं क्या व इसको किस तरिके से निभाया जाता हैं। आज का मानव केवल शारीरिक आकर्षण को ध्यान में रखते हुए, प्रेम की बगदौड सम्भालना चाहता हैं जो कि सरासर समय व भावनाओ को व्यर्थ करने के समान हैं।


Love को अन्य किन रूपो में जाना जाता हैं?

Love जिसे हम आम भाषा मे प्यार कहते हैं इसके अनेको पर्यायवाची हैं सभी का अपना अपना रुख होता हैं अपने भाव को प्रकट व प्रदर्शित करने का। प्यार के कुछ प्रमुख पर्यायवाची इस प्रकार से हैं।

प्रेम, स्नेह,लगाव,अनुराग व अनुरक्ति।

प्राचीन काल से ही बड़े बड़े ऋषि मुनियों के श्री मुख से हम प्रेम की इस अपार डोर के बारे में सुनते आ रहे हैं। और जिस व्यक्ति को सम्पूर्ण व्यष्टि आत्मा और परमात्मा का सही से ज्ञान होता हैं वो इसकी माया को भलीभांति जनता हैं। किसी को केवल I love you बोलने से प्रेम की प्रतिमा की बुनियाद नही रखी जा सकती। उसके लिए हर समय तैयार रहना पड़ता हैं। व हर सुख दुख में एक साथ रहना पड़ता हैं।


Love का जीवन से क्या अभिप्राय हैं?

जैसा की हमने ऊपर वर्णन किया था,कि प्रेम तो जीवन का आधार हैं। व इस संसार का प्रत्येक मानव और जीव प्रेम से ही बंधा हुआ हैं। हालांकि, ऐसा बिल्कुल भी नही हैं कि प्रेम का मतलब केवल मोह्ब्बत व लड़का लड़की से ही लिया जाए। ये इतना बड़ा भाव का सागर हैं जिसकी माया से यह समस्त संसार आगे बढ़ रहा हैं।

वेदों व आध्यत्मिक ग्रन्थो में प्रेम की परिभाषा दी गयी हैं जो आज के समय की प्रेम की वाणी से कही भिन्न हैं। परंतु स्थितियों प्रत्येक जगह एक समान नही होती। आज के वर्तमान समय मे भी ऐसे बहुत से व्यक्ति हैं जो प्रेम के सही अर्थ जानते हैं व उसको ध्यान में रखते हुए अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको Love शब्द के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली होगी। आशा करते हैं यह आर्टिकल आपके किये जानकारी का स्रोत बना होगा।