DAC Full Form? DAC फुल्लफॉर्म व यह किस तरीके से कार्य करता हैं?

DAC एक कंप्यूटर में उपयोग होने वाला ऐसा abbreviation हैं। जिसके बारे में शायद हर कोई यूज़र्स न जानता हो। कंप्यूटर मुख्य रूप से डिजिटल इन्फॉर्मेशन को ही एक्सेस करते हैं। इसीलिए कंप्यूटर को दिए गए प्रत्येक इनपुट को एक डिजिटल फॉरमेट में आउटपुट प्रदान करने की पध्दति को DAC कहा जाता हैं।

DAC Full Form? DAC फुल्लफॉर्म व यह किस तरीके से कार्य करता हैं?


आप यह सोच रहे होंगे कि ये DAC वास्तव ने क्या हैं। तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि DAC की क्या फुल्लफॉर्म होती हैं। व यह किस तरीके से कार्य करता हैं। तो बिना देरी किये शरू करते हैं आज के इस आर्टिकल को जिसमे हम DAC से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी देनी को कोशिश करेंगे।


DAC फुल्लफॉर्म यह किस तरीके से कार्य करता हैं?

DAC जिसे Digital To Analog Converter कहाँ जाता हैं। कंप्यूटर को दिए गए सभी इनपुट्स को आउटपुट फॉरमेट में एनालिसिस करने के लिए DAC का इस्तमाल होता हैं।

आज हम जितने भी कंप्यूटर यूज़ करते हैं, उनमे से अत्यधिक एनालॉग इनपुट पर आश्रित कार्य करते हैं। जिसके लिए DAC का प्रयोग करना अनिवार्य हो गया हैं। इसके अलावा पुराने समय से DACs का उपयोग वीडियो सिग्नल्स को परिवर्तित करने के लिए किया जा रहा हैं। कम्प्यूटर को आउटपुट फार्मेशन प्रदान करने के लिए एनालॉग की जरूरत होती हैं। इसीलिए DACs का इस्तेमाल किया जाता हैं।

इसके अलावा एक DAC एक ऐसी डिवाइस होती हैं। जो डिजिटल ऑडियो संचार को एक सीरीज में कन्वर्ट कर एनालॉग ऑडियो सिग्नल में परिवर्तित करती हैं। यह कंप्रोसेड सीरीज 0s से लेकर 1s तक होती हैं। बहुत सी स्थिति में हम DAC को डायरेक्ट हैडफ़ोन से नही जोड़ सकते हैं। इसके लिए हमे एनालॉग की जरूरत होती हैं। जो DAC के द्वारा दिया जाता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर संचार के लिए USB इस्तमाल होता हैं जो कंप्यूटर से जुड़ा रहता हैं।


Analog सिग्नल क्या होता हैं?

एनालॉग ऑडियो सिग्नल एक तरिके से साउंड तरंग पर कार्य करता हैं।जिसके द्वारा लगातार वोल्टेज निर्धारत होती रहती हैं। उदाहरण के तौर पर आप ऐसे समझ सकते हैं एक माइक्रोफोन आने वाली ध्वनियों को उन ध्वनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक एनालॉग विद्युत संकेत में बदल देता है; कमरे के स्पीकर एक एनालॉग इलेक्ट्रिकल सिग्नल को मूल ध्वनि (या जितना संभव हो उतना करीब) में परिवर्तित करते हैं। इसके अलावा DAC डिवाइस के उदाहरण को आप एक modem

की सहायता से भी समझ सकते हैं। एक मॉडेम जिसे DAC की जरूरत होती हैं डेटा को एनालॉग में कन्वर्ट करने के लिए जो कि एक टेलीफोन के तार से जुड़ा रहता हैं।

DAC कितने प्रकार के होते हैं?

सामान्यतः DAC को निम्न दो वर्गों में विभाजित किया गया हैं।

  1. Weighted Resistor DAC
  2. R 2R Ladder DAC

अब विषय यह कि ये दोनों का क्या कार्य हैं। तो एक एक करके हम दोनों के बारे मे जानकारी हासिल करेंगे।

Weighted Resistor DAC

किसी भी व्यवस्थित सर्किट में एनालॉग आउटपुट को उतपन्न कर जो कि बराबर होता हैं एक डिजिटल बाइनरी इनपुट के उसे जोड़ने पर जो adder सर्किट प्राप्त होता हैं उसे weighted resistor DAC कहाँ जाता हैं।


DAC की आवयश्कता क्यों होती हैं?

क्या कभी आपने सोचा हैं कि हमे digital to analog की जरूरत क्यों होती हैं। आज से कई दशकों पहले हमें DAC जैसी पदत्ति की कोई जरूरत नही थी एनालॉग उत्तपन्न करने के लिए।

उस समय माइक्रोफोन में पहले से ही एनालॉग सिगनल को एकत्र करने के लिए डिवाइस लगी होती थी। जब कभी भी कोई संगीत का संचार करना होता था, तो वो आसानी से एनालॉग खुद ही उतपन्न कर स्पीकर्स तक पहुच जाता था। लेकिन आज के वर्तमान समय मे यह एनालॉग सिग्नल्स को एक सीरीज के रूप में व्यवस्थित कर दिया गया हैं। जिससे की एक बेहतर डिजिटल ऑडियो प्राप्त हो सके।

अधिकांश उपकरणों के अंदर आंतरिक डीएसी घड़ी की त्रुटियों को अच्छी तरह से संभालने के लिए सुसज्जित नहीं हैं, इसलिए वे अधिक घबराहट पैदा करते हैं। दूसरी ओर, अधिकांश बाहरी, या आउटबोर्ड, डीएसी इन त्रुटियों को कम करने के लिए सुसज्जित हैं। नतीजतन, वे आपके संगीत को एक और शून्य के बिटस्ट्रीम से अधिक प्रभावी ढंग से फिर से इकट्ठा करते हैं।

तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हमने जाना की वास्तव मे DAC जिसे डिजिटल तो ऐनलॉग कन्वर्टर कहाँ जाता हैं। इसका मुख्य क्या कार्य हैं। आज के काफी दशकों पूर्व डिजिटल ऐनलॉग को मैन्टैन करने के लिए इतने बड़े पमेने पर संसाधन नहीं थे, व डिजिटल ऐनलॉग को पहले से ही डिवाइस मे सेट किया जाता था।

लेकिन आधुनिक तकनीकी व खोज कर चलते हुए आज सब कुछ पूरी तरह से बदल गया हैं। ओर हमारे पास DAC जैसी आधुनिक सिग्नलस कार्य प्रणाली हैं जिनकी मदद से हम कोई भी औडियो व विडिओ सिग्नलस को बड़ी ही आसानी से संचार के रूप मे सुन सकते हैं। तो आशा करते हैं आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको DAC के बारे मे पर्याप्त जानकारी मिली होगी।

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