Bulb का अविष्कार किसने ओर कब किया? Bulb Ka Avishkar Kisne Kiya?

आज से लगभग १००० वर्ष पूर्ण जब अधिकांश मानव जंगलो में रहा करते थे। उस समय रोशनी जैसा शब्द महज एक सपना था। बहुत ही प्रयशो के बाद मानव ने कही जाकर आग की खोज की। परंतु जैसे जैसे समय बीतता गया, नवीन खोज व उपकरणों के चलते काफी अविष्कार हुए। आज के इस नये युग मे जहाँ हमने अपनी आंखें रोशनी व बल्बों की दुनिया मे खोली हैं उसके पीछे बहुत ही लम्बा इतिहास हैं।

Bulb का अविष्कार किसने ओर कब किया? Bulb Ka Avishkar Kisne Kiya?

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको एक ऐसी ही नवीन व दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खोज के बारे में बताएंगे। जी हाँ, आज के इस कथन में हम चर्चा करेंगे कि बल्ब का अविष्कार किसने ओर कब किया। आज हमारे चारों ओर जितनी भी विद्युत व उससे चलने वाले यन्त्र उपस्थित हैं उन सभी के पीछे विद्युत धारा की खोज हैं।


तो बिना समय को व्यर्थ करते हुए सीधे शरू करते हैं आज के इस कथन को।

Bulb का अविष्कार किसने ओर कब किया?

Bulb का अविष्कार दुनिया के जाने माने प्रसिद्ध अविष्कारक थॉमस अलवा एडिसन ने सन 1879 में किया। बल्ब का अविष्कार विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खोजो में से एक हैं। एक जहाँ सम्पूर्ण संसार अंधेरे में अपना समय व्यतीत करता था। रोशनी उतपन्न करने के लिए केवल मानव दीयो व लैंप आदि का प्रयोग करते थे। उसी समय दूसरे प्रान्त में मौजूद वैज्ञानिक एडिसन निरन्तर अपनी प्रयोगशाला में शोध करने ने व्यस्त थे। उन्होंने समूर्ण विश्व को आश्वाशन दिया था, कि शीघ्र ही वो दुनिया को बल्ब के माध्यम से रोशनी देंगे।

हालांकि, उनकी इस टिप्पणी को बहुत से लोगो ने हाषय का विषय बनाया। परंतु एडिसन ने बिना किसी अवरोध के निरन्तर अपनी खोज जारी रखी। और वर्ष 1879 में उन्होंने विद्युत परवाह को tungsten Wire की मदद से बल्ब का अविष्कार कर समूर्ण विश्व को रोशनी प्रदान की।


Bulb से हम क्या समझते हैं?

Bulb एक ऐसा उपकरण हैं जिसमे विद्युत प्रवाह की मदद से tungsten wire को गर्म कर रोशनी उतपन्न कराई जाती हैं। Bulb के अंदर noble gas में एक argon गैस होती हैं। शरुआती दौर में बल्ब का निर्माण करने में बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ा।

लेकिन एडीसन के कठिन प्रयशो व मेहनत को देखते हुए, उन्होंने अपने इस अद्धभुत अविष्कार को हकीकत में बदल दिया और सम्पूर्ण जगत को रोशनी प्रदान की। bulb के आविष्कार ने मानो सारे संसार को एक ऊर्जा का संचार प्रदान करने का अवसर दिया। एक जहाँ तेल के दिये व मोमबत्ती से रोशनी मिलती थी। उसके स्थान पर लोगो के पास बल्ब का विकल्प था। इसके अलावा एडिसन ने न केवल बल्ब का ही अविष्कार नही किया बल्कि इसके साथ साथ ऐसे अन्य दिव्य खोज व यन्त्र की उपलब्धि की।

जिनमे ग्रामोफ़ोन, ट्रांसमीटर व एल्कलाइन स्टोरेज बैटरी आदि शामिल थी। थॉमस अलवा एडिसन के नाम पर 1000 से ज्यादा यंत्रो की खोज के पेटेंट हैं। अथार्त विश्वजगत उनको इस आधुनिक अविष्कार के रूप में सदैव स्मरण करता हैं।

Bulb की खोज से दुनिया को क्या दिशा प्रदान हुई?

Bulb की इस नवीन खोज ने केवल हमे रोशनी मिली हैं परंतु इसके अलावा ऐसे बहुत से यन्त्र व विद्युत की स्थापना हुई जिससे मानव कभी परिचित ही नही था। शरुआती दौर में विद्युत धारा के बहाव को लेकर अनेक धारणा बनी थी, परंतु धीरे धीरे इस विषय की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद इसके अवरोधक बनाये गए।

आज हमारे आस पास विद्युत से बने लाखो यन्त्र व गैजेट्स हैं जो उसी प्राचीन प्रणाली पर कार्य करते हैं। magnetism से लेकर electronic communication के हर क्षेत्र में विद्युत धारा का होना अनिवार्य हैं और इन सबका श्रेय एडिसन को जाता हैं। उनकी इस खोज ने न केवल आज हमे बल्ब प्रदान हुआ हैं बल्कि bulb के समान अन्य यन्त्र भी विभाजित हो गए हैं।

LED Bulb से लेकर CFL लाइट, इलेक्ट्रिक लैंप ये सभी नवीन यन्त्र की उत्पत्ति bulb के आविष्कार से ही ली गयी हैं। इसके चलते अगर वास्तविकता की दृष्टि से देखा जाए तो bulb के आविष्कार ने मानव समाज को वो दिशा दी हैं जिसके फलस्वरूप आज सम्पूर्ण विश्व रोशनी की राह पर हैं।


तो इस आर्टिकल के माध्यम से आज हमने जाना की bulb का अविष्कार किसने ओर कब किया। bulb के आविष्कार से हमारे समक्ष रोशनी पैदा करने के आज इतने विकल्प हैं जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नही था। इस दुर्लभ अविष्कार की देन का श्रय थॉमस अलवा एडिसन को दिया जाता हैं।

प्राचीन समय में जो रोशनी को लेकर उपकरणों की त्रुटि थी, वो bulb के आविष्कार के बाद खत्म हुई और आज bulb से प्रत्येक व्यक्ति भलीभांति परिचित हैं। इस दुर्लभ अविष्कार से समूर्ण जगत का अंधकार विलुप्त हो गया हैं इसी कारणवश bulb की खोज को सबसे उत्तम व उच्च श्रेणी के अविष्कारों में गिना जाता हैं। विद्युत प्रवाह के इस नवीन उपकरण के माध्यम से हमे सर्वदा थॉमस अलवा एडिसन को याद रखेंगे। उनकी इस अविष्कार की वजह से ही आज हमे रोशनी की किरण विद्युत ऊर्जा के रूप में मिलती हैं।